बम्बई महज़ शहर नही एक सोच का दरिया है..

इस शहर की कुछ ख़ास  बात है..
यहाँ ढलता सूरज उगता चांद सब पाक है..
उम्मीदों का बुना हुआ यह शहर हर पल गाता एक नया राग है..
ना जाने कितने सरफिरे सपनो की आस ले आते है कुछ ठहरते है तो कुछ समुंदर की बौछार से मिलो दूर चले जाते है खुद ब खुद
कभी कोई खुद से बिछड़ जाता है तो कभी कोई भुला भटका घर लौट के आता है..
यूँ तो सड़के यहाँ की सपाट है पर कंकड़ बहुत है..
कभी खून बह जाता है तो कभी ज़ख्मो के निशान छोड़ जाता है...
यहाँ की बंद खिड़कियों में भी छुपी आस है..
गिरते गिरते गिर जाता है हिम्मत का हर पुतला गर मिट्टी उसकी पटरी से एक पल के लिए भी उतरी..
इस शहर के आंचल में मीठे पल है जिसने बिताये उसे भी डर है मसरूफियत की चाह में वह भी कही बिक ना जाये..
मुस्कुराता हुआ यह शहर ना जाने कितने अश्क है छुपाये हर रोज लोगो का दिल यह बहलाये...
रूठे हुए बाघी को मनाना इसे आता नहीं हालातों से लड़ना सबको यह सिखाता नही
बम्बई शहर की कुछ ख़ास बात है..
बम्बई एक सोच है एक उम्मीद है एक आस है...
यहाँ कोई जाता नही है यह शहर खुद पर खुद बुलाता है..
और बुलाता जरूर है....                                                                                         
                                                                                                                                           आकांक्षा

                                                                                                                             

                                                                                                                                    

Comments

  1. Very nice blog.
    It's really true.

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  2. AATI SUNDAR. AISE HI LIKHTE RAHIYE..MAINE TO AAP KO BAHUT PEHLE HI KAHA THA KI AAP BAHUT ACHACHI LIKHTI HAI.

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  3. बहुत खूब मेरे बेटे बहुत खूब

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  4. Beautiful line yrr dil ko touch kar gyi line ♥️♥️♥️😁☺️☺️

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  5. Beautiful lines by a blessed writer

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  6. Supperrrrr blog..
    Keep writing..

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  7. It's sheer beauty. Loved the soulful flow of words ❤️❤️❤️

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