एक रोज़ मैं फिर मिलूँगी

एक रोज़ मैं फिर मिलूँगी तुमसे ढलते सूरज की रोशनी में पार्क के उसी कोने वाले बैंच पर जहाँ हम अक्सर दुनिया से नज़रें छुपा कर मिला करते थे। पार्क के बीचों बीच लगी वो लाइट मेरे और तुम्हारे बीच की दूरियों को एक रोशनी से भरा आईना दिखा रही होगी। पेड़ पर बनाये हुए घोंसलों में से चिड़िया भी छुप छुप कर हमें देख रही होगी उसे भी शायद एहसास होगा हमारी दूरियों का। इर्दगिर्द के बेंच खाली होंगे उस रोज़ पार्क में टहलते हुए लोगों ने भी मानो आँखों में पटियां बांध ली हो और हम उन्हें दिख ही नही रहे हो। सब कुछ ठीक वैसे ही हो रहा होगा जैसा मैंने उस पेंटिंग में बनाया था।
वही पेंटिंग जिसे दिखाने के लिए तुम्हे मैं बेसब्री से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी पर तुम्हारे पास वक़्त ही नही था, खैर इस बात की नाराज़गी तो तुम्हे खुद से भी थी। तुम हमेशा से एक ऐक्टर बनना चाहते थे 24घंटे एक्टिंग मोड मे रह कर थक जाते थे यह बात मुझे तुम्हारे मुस्कुराते हुए चेहरे पर हमेशा दिखती थी, उस मुस्कुराहट के पीछे छुपे हुए तुम्हे, मैंने अपनी उस पेंटिंग में उतारा था जहाँ तुम सिर्फ तुम हो एक ऐक्टर नही एक ऑर्टिस्ट जिसे हादसों के धागों ने बड़ी खूबसूरती से पिरोया था,थोड़ी एक्टिंग तुम्हारे साथ रह कर मैं भी कर लेती थी पर ऐक्टर बनना बचपन मे झूठ मुठ के रोने से तो कई गुना ज्यादा मुश्किल था यह बात मुझे पता थी पर तुमसे मिलने के बाद इसे महसूस भी कर लिया था उस पल जब हर एक पल महज़ एक फ़िल्म का सीन बन गया था मुझे लगता रहा कि मैं हकीक़त में जी रही लेकिन अंत में जब सब खड़े हो कर तालियाँ बजाते हुए निकल गए तो मुझे एहसास हुआ शायद यह फ़िल्म चल रही थी और तुम उस फिल्म के हीरो बन गए थे पर तुम वो हीरो नही थे जिसे मैंने अपनी पेंटिंग में उतारा था, तुम थे भी वही तुम नही भी थे। मैं एक कोने में बैठी चीखती रही चिलाती रही रोकती रही तुम्हे बार बार पर तुम्हे मैं दिखी ही नही या शायद मै किसी को भी नही दिखी तुम हीरो थे फ़िल्म में तुम गए और सब चले गये। मेरी वो पेंटिंग आधी अधूरी रह गई  उसमे रंगो के साथ प्यार जज़्बात एहसास सब भर दिया था मैंने बस तुम्हारी नज़रों से रूबरू नही करा पाई। 
एक लंबा वक्त गुज़र गया मैं आज भी उसी पेंटिंग में तुम्हे ढूंढती हूँ जहाँ तुम ऐक्टर नही आर्टिस्ट हो  तुमसे जल्दी ही उसी पेंटिंग की तरह मिलूँगी जहाँ मैं हूँगी तुम होगे और हमारे बीच में दूरियों का एक गहरा समुन्दर होगा।
                                                                  आकाँक्षा


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