तू ख़ुश रहे, आबाद रहे

हर लड़ाई में इंसान अपना कुछ स्टेक पर रख कर लड़ता है।कभी कोई रिश्ता, कभी जज़्बात, कभी एहसास तो कभी खुद इंसान।
आज का दिन मेरे लिए बेहद ख़ास है।

                            " तू ख़ुश रहे, आबाद रहे
                     ताउम्र मेरी बस यही एक फरियाद रहे"

आज उसका जन्मदिन है, रात के बर्थडे टेक्स्ट के रिप्लाई वह सुबह उठकर सबको कर रहा होगा। अब तक जल्दी सोने की आदत नही बदली होगी उसकी, जनाब रात भर सिर्फ और सिर्फ काम के लिए जाग सकते है, वह भी आँखों में नींद लेकर। इस वर्ष अपने घर वालों के साथ वह अपना बर्थडे मना रहा होगा और साथ में ही कुछ पुराने बचपन के दोस्त जिन्हें वो दोस्त नही परिवार मानता है। उसके चेहरे की मुस्कुराहट को मैं ना जाने कैसे लेकिन महसूस कर सकती हूँ, ऐसा लगता है मानो वह मेरे साथ ही है, मेरे पास और मैं खुशी में ज़ोर-ज़ोर से हैप्पी बर्थडे का गाना गा रही हूँ, केक का छोटा सा बाइट कट कर के उसे अपने हाथों से खिला रही हूँ। वह सारे तोहफे जो इस बार भी उसके लिए बनाया है वो सब सामने बैठकर उसे दिखा रही हूँ।
हर चीज बेहद खूबसूरत है,ठीक वैसे ही जैसे पिछले साल इसी तारीख को था, यानी कि उसके जन्मदिन के दिन, जब मैं उसके साथ थी।बिना किसी डर के आधी रात को उसके कमरे में घुसने के उपाय ढूंढ रही थी, पर अंत मे सारे उपाय फेल हो जाने पर हार मान के मैं अपने कमरे से उसके कमरे की उछल कूद सुन कर खुश हो गई थी। वह पूरे दिन मुझे काम के लिए डाँटता रहता और मैं उसका जन्मदिन मनाने के तरीके ढूंढती रही। जन्मदिन उसका था और खुशी से मेरा चेहरा चमक रहा था। वो लोग जो मुझे पागल कहते थे,सच ही कहते थे वो।उसकी मुस्कुराहट के लिए मुझे सारे पागलपन मंज़ूर थे।

             "शर्म,हया, लाज सब खो बैठी हूँ
        तुझे मोहब्बत करते करते तुझसे ही दूर हो बैठी हूँ"

एक गहरी कमी थी मेरी ज़िंदगी मे जो वो पूरी करते गया और देखते देखते इस कदर जरूरी बन गया । वो सबसे अलग था,चेहरे पर उसके question mark का चिन्ह हमेशा बना रहता था।कभी मुस्कुराता भी तो फॉर्मेलिटी करता था, पर मजाल हो जो उसकी इस फॉर्मेलिटी को कोई पकड़ ले। क्या कर रहा है क्यों कर रहा है यह आम लोगों के समझ के परे था। कभी-कभी तो मेरे भी।       मैं उसे बहुत करीब से जानती थी इतना करीब से जितना पानी अपने अंदर बन रहे बुलबुले से होता है, जितना मिट्टी अपने ऊपर उग रहे पौधे से होता है, जितना लकड़ी में लगी हुई आग अपनी ही लपट से होता है। वो अक्सर  कहता था कि यह नज़दीकी ही दूरियों का कारण होगी।इस बात पर मैं हमेशा नाराज़ हो जाती थी, पर सच ही तो बोलता था वो, फिर मैं नाराज़ क्यों होती थी, शायद कायर थी मैं, डरती थी उससे दूर जाने से।
आज भी कायर हूँ आज भी डरती हूँ उसके ख्याल से दूर जाने से उसके सपने उसकी तस्वीर उसकी यादें जो मेरी आँखों में कैद है..उन सब को मैं आज भी खोने नही देना चाहती।जैसे कोई अपने हमसफ़र से दूर नही जाना चाहता वैसे ही इन यादों को मैं अपने आँखों से दूर नही जाने देना चाहती । 
भ्रम में जीवित रहना अच्छा होता बस तब तक जब तक आपका भ्रम टूटे ना। आज उसका जन्मदिन है और मैंने  इस भ्रम को टूटने नही दिया कि मैं उसके साथ हूँ, और बड़ी धूम धाम से उसका जन्मदिन मना रही हूँ।

                    " मुझसे बेहतर उसे कौन जानता होगा
      मैं लिख देती हूँ उसे बेबाकी से, इतना उसे कौन मानता होगा"

आज भी वही पुराने ख्याल मेरे दरवाजे पर खटखटाए वही पुराने सवाल मेरे कानों में गूंज रहे है। क्या वो मुझे सोचता होगा,भूले भटके वो मुझे याद करता होगा, अपने जन्मदिन पर मेरे पिछले साल के दिए हुए तोहफे को एक बार भी देखा होगा, कभी फ़ोन की गैलरी में पुरानी तस्वीर देखते हुए मेरी तस्वीर आते ही उसकी उंगलियां थम जाती होंगी, क्या मेरी तस्वीर देख के उसे वो पुराने दिन याद आते होंगे, क्या वो मैरून चेक वाली शर्ट पहनते हुए उसे मेरे चेहरे का एक्सप्रेशन याद आता होगा।
 शायद नहीं, वह सब कुछ भूल चुका होगा , वह कमरे की सजावट, वह खामोश निगाहें, वह बिस्तर पर बिखरे हुए लम्हें, वह टूटा हुआ पायल, वह गुलाब की पंखुड़ियों में छुपी हुई तस्वीर, वह सफेद चादर पर बिखरे हुए फूलों के रंग, यह सारी यादें धुंधली पढ़ गई होंगी उसके लिए जैसे घर मे रखे पुराने जूतों पर घुल की परत जम जाती है,ना ही वह जूते कभी हम पहनते हैं, ना ही वो धूल कभी हटती है।
                     "अब कोई गुफ़्तुगू नही होती उनसे
         वो मेरे गलियों में अब भी आते जाते हैं, बस भेष बदले हुए" 

Comments

  1. It's really very amazing pure and so relatable

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  2. Deeply touching! Loved the vivid description of emotions and feelings! ❣️

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